अब कॉलेज और विश्वविद्यालय के कॉपियों का मूल्यांकन डिजिटल होगा- देखें पूरा प्रोसेज:-देश के शिक्षा सिस्टम में तेजी से डिजिटल बदलाव हो रहा है। पहले स्कूल बोर्ड परीक्षाओं में OMR और डिजिटल मूल्यांकन लागू हुआ, और अब बड़ी खबर यह है कि कॉलेज और विश्वविद्यालय की कॉपियों की जांच भी पूरी तरह डिजिटल होने जा रही है।
नई व्यवस्था में परीक्षक को घर बैठे कंप्यूटर या लैपटॉप पर स्कैन कॉपी चेक करनी होगी। इससे रिजल्ट जल्दी आएगा, गड़बड़ी कम होगी और छात्रों को पारदर्शी मूल्यांकन मिलेगा।
यह व्यवस्था कई राज्यों और विश्वविद्यालयों में लागू होने लगी है और आने वाले वर्षों में लगभग सभी यूनिवर्सिटी में लागू हो जाएगी।
विवि और कॉलेजों में कॉपियों का डिजिटल मूल्यांकन होगा
विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों की परीक्षा की कॉपियां का अब डिजिटल मोड में मूल्यांकन होगा। डिजिटल मोड में ही संबंधित शिक्षकों के पास उत्तर पुस्तिकाएं स्कैन कर भेजी जाएंगी। राजभवन को इसे लागू करने का प्रस्ताव दिया गया है। राजभवन की सहमति मिलते ही राज्य में इस नई व्यवस्था को लागू कर दिया जाएगा।
शिक्षा मंत्री ने विप में जानकारी दी, राजभवन को भेजा गया है प्रस्ताव, भाषायी अकादमिन
शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने शुक्रवार को विधान परिषद में यह जानकारी दी। मंत्री उर्मिला ठाकुर के ध्यानाकर्षण का उत्तर दे रहे थे। उन्होंने कहा कि कॉपियों को कहीं भेजने में काफी समय लगता है और राशि भी अधिक खर्च होती है। समय पर रिजल्ट प्रकाशन को लेकर यह पहल की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षा का रिजल्ट बिहार में सबसे पहले जारी होता है। पर, विश्वविद्यालयों में दिक्कत है।
विश्वविद्यालयों में भी समय पर परीक्षा का आयोजन और रिजल्ट प्रकाशन को लेकर राजभवन से विचार-विमर्श किया गया है। शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि राज्य की सभी भाषायी अकादमियों को सुदृढ़ किया जाएगा। इसको लेकर सर्च कमेटी का गठन जल्द ही किया जाएगा। कमेटी द्वारा ही अकादमियों के प्रमुख पदों पर पदस्थापित करने के लिए योग्य व्यक्तियों का चयन किया जाएगा। अकादमियों को ऑटोनोमस बनाया जाएगा।
समर्थ पोर्टल पर कॉपियां अपलोड की जाएंगी
समर्थ पोर्टल के माध्यम से कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राओं की परीक्षा की कॉपी डिजिटल जांची जाएगी। इससे रिजल्ट जल्दी जारी हो जाएगा। कॉपी को स्कैन कर पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। संबंधित विषय के शिक्षकों के लॉगिन में कॉपी पोर्टल के माध्यम से ही भेज दी जाएगी। शिक्षक डिजिटल तरीके से कॉपी जांच कर अंक देते जाएंगे।
वित्तरहित स्कूल-कॉलेज के शिक्षकों को मिले नियमित वेतन
कांग्रेस ने वित्तरहित स्कूल-कॉलेजों के शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को नियमित और समान वेतन लाभ देने की मांग की है। पार्टी के मीडिया विभाग के चेयरमैन राजेश राठौड़ ने शुक्रवार को कहा कि सरकार को इनकी महत्ता समझनी चाहिए। राज्य में सरकारी कॉलेजों की संख्या में कमी है। यदि वित्तरहित शिक्षण संस्थान ना हो तो बिहार के हजारों विद्यार्थी उच्च शिक्षा से वंचित रह जाएं।
- डिजिटल मूल्यांकन से रिजल्ट जल्दी जारी होगा
- कॉपियों को लाने-ले जाने का खर्च और समय बचेगा
- पारदर्शिता रहेगी, अंकों की हेराफेरी नहीं हो सकेगी
- कॉपियों को स्कैन कर संबंधित परीक्षक के पास भेजा जाएगा
डिजिटल कॉपी मूल्यांकन क्या है?
डिजिटल मूल्यांकन (Digital Evaluation System) एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें छात्र द्वारा लिखी गई उत्तर पुस्तिका (Answer Sheet) को स्कैन करके ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अपलोड कर दिया जाता है और परीक्षक उसी पोर्टल पर लॉगिन करके कॉपी चेक करता है।
यानी अब परीक्षक को कॉपियों का बंडल घर या कॉलेज ले जाने की जरूरत नहीं होगी — सब कुछ ऑनलाइन होगा।
पहले कॉपी जांच कैसे होती थी?
पहले की व्यवस्था में:-
- परीक्षा खत्म होने के बाद कॉपियां केंद्र से विश्वविद्यालय भेजी जाती थी
- कॉपियों के बंडल परीक्षकों में बांटे जाते थे
- शिक्षक घर या कॉलेज में बैठकर जांच करते थे
- मार्क्स मैन्युअल रूप से भरे जाते थे
- फिर डेटा एंट्री ऑपरेटर सिस्टम में अंक डालता था
समस्या क्या होती थी?
- रिजल्ट आने में 3–6 महीने लग जाते थे
- कॉपी खोने की शिकायत
- गलत मार्किंग
- टोटलिंग में गलती
- मार्क्स एंट्री में गड़बड़ी
- भ्रष्टाचार और पक्षपात की संभावना
इसी समस्या को खत्म करने के लिए डिजिटल मूल्यांकन लाया गया।
अब नई डिजिटल प्रक्रिया कैसे काम करेगी?
अब पूरी प्रक्रिया 6 स्टेप में होगी:-
1. परीक्षा खत्म होने के बाद कॉपी स्कैन होगी
- परीक्षा केंद्र से उत्तर पुस्तिका स्कैनिंग सेंटर भेजी जाएगी
- हाई-स्पीड स्कैनर से हर पेज स्कैन होगा
- PDF फाइल बनेगी
- हर कॉपी को यूनिक बारकोड मिलेगा
अब कॉपी खोने का खतरा खत्म
2. सर्वर पर कॉपी अपलोड होगी
- स्कैन की गई कॉपी यूनिवर्सिटी के सुरक्षित सर्वर पर अपलोड होगी
- छात्र का नाम, रोल नंबर छुपा रहेगा (Anonymous Checking)
- सिर्फ कोड नंबर दिखाई देगा
परीक्षक को नहीं पता चलेगा कॉपी किस छात्र की है
3. परीक्षक को ऑनलाइन कॉपी मिलेगी
- परीक्षक को लॉगिन ID और पासवर्ड दिया जाएगा
- पोर्टल में रोज निश्चित संख्या में कॉपी मिलेगी
- कॉपी कंप्यूटर स्क्रीन पर खुलेगी
घर बैठे जांच संभव
4. स्क्रीन पर डिजिटल मार्किंग होगी
परीक्षक:-
- माउस या स्टायलस से टिक लगाएगा
- गलत उत्तर पर क्रॉस करेगा
- अंक सीधे सिस्टम में दर्ज करेगा
- हर प्रश्न के अलग-अलग नंबर भरेंगे
टोटल सिस्टम खुद करेगा
5. ऑटोमेटिक टोटल और लॉक
- जैसे ही जांच पूरी — मार्क्स लॉक
- दोबारा बदलाव नहीं
- मॉडरेशन टीम ऑनलाइन देखेगी
गलती की संभावना लगभग खत्म
6. तुरंत रिजल्ट तैयार
- सभी अंक डेटाबेस में सेव
- रिजल्ट ऑटो जनरेट
- 20–40 दिन में रिजल्ट संभव
डिजिटल मूल्यांकन के बड़े फायदे
छात्रों के लिए
- रिजल्ट जल्दी मिलेगा
- कॉपी दोबारा जांच आसान
- पारदर्शिता
- गलत मार्किंग कम
- रीचेकिंग ऑनलाइन
शिक्षकों के लिए
- कॉपी उठाकर ले जाने की जरूरत नहीं
- घर बैठे जांच
- भुगतान भी ऑनलाइन
- काम ट्रैक रहेगा
विश्वविद्यालय के लिए
- भ्रष्टाचार कम
- रिकॉर्ड सुरक्षित
- डेटा एनालिटिक्स संभव
- रिजल्ट समय पर
रिजल्ट जल्दी आने की वजह
पहले:-
| प्रक्रिया | समय |
|---|---|
| कॉपी पहुंचना | 10 दिन |
| जांच | 45 दिन |
| डेटा एंट्री | 20 दिन |
| रिजल्ट | 90 दिन |
अब:-
| प्रक्रिया | समय |
|---|---|
| स्कैनिंग | 5 दिन |
| जांच | 20 दिन |
| ऑटो रिजल्ट | 5 दिन |
क्या छात्र अपनी कॉपी देख पाएंगे?
हाँ, नई व्यवस्था में:-
- छात्र पोर्टल पर लॉगिन करेगा
- स्कैन कॉपी डाउनलोड कर सकेगा
- देख सकेगा किस प्रश्न में कितना अंक मिला
इसे Student Transparency System कहा जा रहा है।
रीचेकिंग / स्क्रूटनी भी डिजिटल होगी
अब छात्र को आवेदन देना होगा:-
- पोर्टल पर आवेदन
- फीस ऑनलाइन
- दूसरी शिक्षक को कॉपी भेजी जाएगी
- नया रिजल्ट अपडेट
कॉपी दोबारा खोलने की जरूरत नहीं
क्या इससे नकल या पक्षपात खत्म होगा?
काफी हद तक हाँ।
क्योंकि:-
- नाम छुपा रहेगा
- कॉलेज का पता नहीं होगा
- कॉपी रैंडम शिक्षक को जाएगी
- मॉडरेशन टीम निगरानी करेगी
किन परीक्षाओं में लागू होगा?
यह प्रणाली लागू होगी:-
- BA / BSc / BCom
- MA / MSc / MCom
- BEd
- Engineering
- Polytechnic
- University Semester Exams
धीरे-धीरे सभी विश्वविद्यालय में अनिवार्य होगी।
क्या शिक्षक विरोध करेंगे?
शुरुआत में कुछ परेशानी होगी:-
- कंप्यूटर ज्ञान की जरूरत
- इंटरनेट चाहिए
- प्रशिक्षण लेना होगा
लेकिन सरकार ट्रेनिंग प्रोग्राम चला रही है।
डिजिटल मूल्यांकन से छात्रों को क्या फायदा?
- साल बर्बाद नहीं होगा
- एडमिशन समय पर
- नौकरी फॉर्म भर पाएंगे
- स्कॉलरशिप नहीं रुकेगी
- माइग्रेशन जल्दी मिलेगा
भविष्य में क्या होगा?
आने वाले समय में:-
- AI मार्किंग सिस्टम आएगा
- सब्जेक्टिव कॉपी भी आंशिक AI जांच
- रिजल्ट 7 दिन में संभव
भारत धीरे-धीरे पूरी तरह Paperless University System की ओर बढ़ रहा है।
निष्कर्ष
कॉलेज और विश्वविद्यालय में डिजिटल कॉपी मूल्यांकन शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा सुधार है। इससे छात्रों को समय पर रिजल्ट मिलेगा, पारदर्शिता बढ़ेगी और विश्वविद्यालय की कार्यक्षमता सुधरेगी।
अब वह दौर खत्म होने वाला है जब रिजल्ट के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता था। नई तकनीक के साथ शिक्षा प्रणाली तेज, सुरक्षित और आधुनिक बन रही है।
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