साइकिल पोशाक छात्रवृत्ति का पैसा- ऐसे अपना नाम जोड़ लीस्ट में – शिक्षा कोष पोर्टल पर राज्य के सरकारी स्कूलों के कक्षा 9 से 12 तक के 7 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं के ब्योरे में गलतियां हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए शिक्षा विभाग ने 24 जिलों के जिला कार्यक्रम पदाधिकारियों (योजना एवं लेखा) को कारण बताओ नोटिस भेजा है। साथ ही, जिला शिक्षा अधिकारियों को एक सप्ताह के अंदर गलतियों को सुधार कराने का निर्देश दिया है।
छात्रों के ब्योरा में लापरवाही 24 डीपीओ से जवाब तलब
ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर 18 लाख 95 हजार 270 छात्र-छात्राओं के डाटा की जांच कर उन्हें सही करना था। इसमें से 11 लाख 86 हजार 744 छात्र-छात्राओं के डाटा की गलतियों को सुधार लिया गया है। लेकिन, सात लाख विद्यार्थियों के व्योरे में अब भी त्रुटियां मौजूद हैं। सुधार की यह मुहिम जून 2025 में शुरू हुई थी और शिक्षा विभाग ने सभी जिलों के विद्यार्थियों के ब्योरे में जनवरी के अंत तक हर हाल में सुधार करने की हिदायत दी थी।
09 से कक्षा 12 तक के बच्चों के नाम, पिता के नाम, आधार में त्रुटि
अगर इन सात लाख विद्यार्थियों के डाटा में त्रुटियां दूर नहीं हुई तो इन बच्चों पर शिक्षा विभाग की लाभुक योजनाओं से वंचित होने का खतरा पैदा हो गया है। ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर विद्यार्थियों का ब्योरा स्कूल प्रबंधन की ओर से डालना जरूरी है। इसे पूर्ण कराने की जिम्मेदारी डीपीओ (योजना एवं लेखा) की है। विद्यार्थियों के ब्योरे में छात्र-छात्रा का नाम, पिता का नाम, पता, आधार नंबर आदि सही-सही दर्ज करना होता है, ताकि विद्यार्थियों तक सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंच सके।
07 दिनों में शिक्षा विभाग ने डाटा की गलती सुधारने को कहा
विभाग ने भागलपुर, अररिया, औरंगाबाद, भोजपुर, बक्सर, दरभंगा, गया, गोपालगंज, जमुई, जहानाबाद, खगड़िया, किशनगंज, कटिहार, लखीसराय, मधुबनी, मुंगेर, कैमूर, नालंदा, सहरसा, समस्तीपुर ,सारण, सुपौल, सीवान और वैशाली के डीपीओ से जवाब तलब किया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक सज्जन आर ने इनसे यह भी पूछा है कि पिछले दिनों लाभुक आधारित योजनाओं की समीक्षा बैठक में अनुपस्थित क्यों थे ?
जिलावार छात्र-छात्राओं की संख्या, जिनके ब्योरे में त्रुटि
- कैमूर – 484
- गया – 45,355
- सारण – 50,482
- जमुई – 32,141
- मुंगेर – 27,892
- पटना – 37,740
- गोपालगंज – 33,775
- सीतामढ़ी – 49,063
- औरंगाबाद – 28,895
- मुंगेर – 13,410
- भागलपुर – 32,577
- जहानाबाद – 7,569
- लखीसराय – 8,592
- सीवान – 25,812
- कटिहार – 28,100
- वैशाली – 23,034
- नालंदा – 20,071
- मुजफ्फरपुर – 34,192
- मधुबनी – 33,410
- अरवल – 3,770
- दरभंगा – 26,633
- पूर्वी चंपारण – 33,229
- अररिया – 12,655
- सुपौल – 13,678
- सहरसा – 11,360
- समस्तीपुर – 15,907
- किशनगंज – 8,678
- रोहतास – 8,136
- शेखपुरा – 1,956
- बांका – 6,290
- पश्चिम चंपारण – 9,862
- मधेपुरा – 5,893
- पूर्णिया – 9,292
- मधुपा – 3,299
- बक्सर – 1,450
- खगड़िया – 1,210
- शिवहर – 358
डीबीटी से जाती है राशि
कक्षा 9 के सभी छात्र-छात्राओं को साइकिल योजना के तहत साइकिल खरीदने के लिए तीन-तीन हजार रुपये की दर से राशि बच्चों के बैंक में डीबीटी के माध्मय से भेजी जाती है। कक्षा 9 से 12 तक की छात्राओं को पोशाक योजना के तहत प्रति छात्रा 1500 रुपए की राशि दी जाती है। मुख्यमंत्री किशोरी स्वास्थ्य योजना के तहत राज्य के स्कूलों में कक्षा 7 से 12 तक की छात्राओं को सैनिटरी नैपकिन खरीदने के लिए उनके बैंक खाते में सालाना 300 रुपए की दर से राशि भेजी जाती है।
40 फीसदी विद्यार्थियों के ब्योरे में गड़बड़ी
डाटा में सुधार नहीं होने की स्थिति में ये छात्र-छात्राएं छात्रवृत्ति, साइकिल, पोशाक आदि योजनाओं के लाभ से वंचित हो जाएंगे। जिन छात्राओं के डाटा में सुधार नहीं होगा, उन्हें सैनेटरी नैपकिन योजना का लाभ भी नहीं मिलेगा। छात्र-छात्राओं को वित्तीय वर्ष 2025-26 की लाभुक आधारित योजनाओं का लाभ दिया जाना है। वित्तीय वर्ष के समाप्त होने में करीब पौने दो माह का समय शेष है, लेकिन लगभग 40 प्रतिशत छात्र-छात्राओं के डाटा में सुधार की अभी भी आवश्यकता है।
शिक्षा कोष पोर्टल पर नाम और विवरण सही कराना अब बेहद ज़रूरी
अगर आपके घर में कोई बच्चा कक्षा 9 से 12 में सरकारी स्कूल में पढ़ रहा है और अभी तक साइकिल, पोशाक या छात्रवृत्ति की राशि नहीं मिली है, तो यह खबर आपके लिए बहुत काम की है। वजह साफ है—ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर लाखों विद्यार्थियों के रिकॉर्ड में गड़बड़ी।
शिक्षा विभाग ने इस लापरवाही को गंभीरता से लिया है और 24 जिलों के जिम्मेदार अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस तक जारी कर दिया है। साथ ही साफ निर्देश दिया गया है कि एक हफ्ते के भीतर सभी गलतियां सुधारें, नहीं तो छात्रों को योजनाओं से वंचित होने का खतरा रहेगा।
कौन-सी गलतियां सबसे ज़्यादा सामने आ रही हैं?
जांच में जो खामियां सामने आई हैं, वे छोटी दिखती हैं लेकिन असर बहुत बड़ा डालती हैं—
- छात्र या छात्रा के नाम की स्पेलिंग गलत
- पिता/अभिभावक का नाम मेल नहीं खा रहा
- आधार नंबर में त्रुटि
- बैंक खाते से आधार लिंक न होना
- पता या स्कूल विवरण अधूरा
इन्हीं कारणों से डीबीटी के जरिए भेजी जाने वाली राशि फेल हो जाती है।
समय रहते सुधार नहीं हुआ तो क्या नुकसान होगा?
अगर इन 7 लाख विद्यार्थियों के रिकॉर्ड समय पर सही नहीं किए गए, तो उन्हें—
- साइकिल योजना
- पोशाक योजना
- छात्रवृत्ति
- किशोरी स्वास्थ्य योजना
जैसी लाभुक आधारित योजनाओं से बाहर होना पड़ सकता है। खास बात यह है कि ये सभी लाभ वित्तीय वर्ष 2025–26 से जुड़े हैं और साल खत्म होने में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है।
7 दिन की डेडलाइन, 24 जिलों से जवाब तलब
शिक्षा विभाग ने साफ कर दिया है कि अब और ढिलाई नहीं चलेगी।
भागलपुर, अररिया, औरंगाबाद, भोजपुर, बक्सर, दरभंगा, गया, गोपालगंज, जमुई, जहानाबाद, खगड़िया, किशनगंज, कटिहार, लखीसराय, मधुबनी, मुंगेर, कैमूर, नालंदा, सहरसा, समस्तीपुर, सारण, सुपौल, सीवान और वैशाली—
इन सभी जिलों के डीपीओ से 7 दिनों के भीतर रिपोर्ट मांगी गई है।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने यह भी पूछा है कि पिछली समीक्षा बैठक में ये अधिकारी अनुपस्थित क्यों थे।
महत्वपूर्ण लिंक
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