स्कूल में हुआ बड़ा बदलाव – वर्ष 2025-26 में 3,478 माध्यमिक-उच्च माध्यमिक विद्यालयों में फिजिक्स लैब, 3,508 माध्यमिक-उच्च माध्यमिक विद्यालयों में केमेस्ट्री लैब एवं 3,478 माध्यमिक-उच्च माध्यमिक विद्यालयों में बायोलॉजी लैब की स्थापना एवं संचालन के लिए भवन निर्माण के साथ लैब विकसित करने के लिए प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है।
स्कूलों में एक लाख 61 हजार टैबलेट का किया गया वितरण
वर्तमान शैक्षणिक सत्र में राज्य के सभी सरकारी विद्यालयों में 1,61,138 टैबलेट का वितरण किया गया है। इसके माध्यम से शिक्षक उपस्थिति, छात्र उपस्थिति तथा पीएम पोषण योजना का रियल-टाइम डिजिटल अनुश्रवण प्रारंभ करने की योजना है। साथ ही माध्यमिक विद्यालयों में विज्ञान की पढ़ाई को बढ़ावा देने के लिए नवाचार शुरू किये गये हैं। इसके तहत इंटीग्रेटेड साइंस लैब स्थापित की जा रही है।
एक दिन में केवल 19 हजार बच्चों का ही बन रहा अपार
राज्य में एक दिन में औसतन 19 हजार बच्चों का ही अपार कार्ड बन पा रहा है। वहीं लाखों बच्चों का आधार कार्ड के कारण आवेदन नहीं हो सकता है। हर जिले में एक दिन में एक हजार अपार कार्ड भी बने तो एक दिन में राज्य में 38 हजार बच्चों का अपार कार्ड बन जाएंगे। लेकिन ऑपरेटरों की कमी के कारण राज्य में अपार कार्ड बनाने की रफ्तार शुरुआती दिनों की तुलना में धीमी हो गई है।
ऑपरेटरों की कमी से स्कूलों में अपार कार्ड बनाने की रफ्तार धीमी हुई
छह-सात महीने पहले एक दिन में 34 से 35 हजार अपार कार्ड बनते थे। लेकिन, पिछले कुछ माह से इस संख्या में गिरावट दर्ज की गई है। रिपोर्ट के अनुसार कई जिले ऐसे हैं जहां एक दिन में 500 बच्चों का अपार कार्ड भी नहीं बन रहा है। आंकड़े बताते हैं कि बिहार में अपार कार्ड निर्माण में सबसे धीमी गति से काम पूर्वी चंपारण, सहरसा, गया, सीवान और जहानाबाद जिले का है। इन जिले ने अब तक वहां नामांकित बच्चों की तुलना में सबसे कम अपार बनाया है।
इन कारणों से कार्ड निर्माण की गति धीमी
- स्कूलों में पर्याप्त संख्या में ऑपरेटरों की कमी
- बाल पंजी और आधार कार्ड में बच्चों का नाम बेमेल
- यू- डायस और आधार कार्ड में नाम नहीं मैच होना
- कई स्कूली बच्चों के पास आधार कार्ड नहीं
| जिला | कार्ड निर्माण प्रतिशत |
|---|---|
| पूर्वी चंपारण | 41.60% |
| सहरसा | 44.20% |
| गया | 46.52% |
| सीवान | 47.42% |
| जहानाबाद | 47.61% |
20 लाख बच्चे बिना आधार के नामांकित
विभाग के आंकड़ों के मुताबिक हैं राज्य में 20 लाख बच्चे ऐसे जो बिना आधार के ही स्कूलों में नामांकित हैं। इन बच्चों का जब तक आधार नहीं बनेगा तब तक इनका अपार नहीं बनाया जा सकता है। वहीं 64 हजार 584 बच्चों के आधार में त्रुटि के कारण इनके आवेदन को रद्द कर दिया गया है।
क्यों जरूरी है अपार कार्ड
अपार (परमानेंट एकेडमिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम) एक यूनिक 12 अंकों का कोड वाला कार्ड है। यह बच्चों के लिए खास आवश्यक है। यह छात्रों को उनके सभी शैक्षणिक क्रेडिट जैसे मार्कशीट, ग्रेडशीट, डिग्री, डिप्लोमा, प्रमाण पत्र और सह-पाठ्यक्रम संबंधी उपलब्धियों को डिजिटल रूप से जमा करने, मैनेज करने और उन तक पहुंचने में मदद करता है। यह आईडी शिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र में छात्र की स्थायी डिजिटल पहचान के रूप में कार्य करती है।
इस गति से बना अपार कार्ड तो 13 महीने और लगेंगे
मालूम हो कि शत-प्रतिशत अपार कार्ड बने इसके लिए एक साल से कवायद की जा रही। कई बार मेगा अपार दिवस भी आयोजित किए गए। बावजूद इसके एक साल में इतने बच्चों का अपार कार्ड नहीं बन सका है। अपार बनाने की यदि यही गति रही तो शत-प्रतिशत लक्ष्य प्राप्ति में लगभग 13 महीने और लगेंगे।
पांच हजार स्कूलों में आईसीटी लैब खुलेंगी
अगले सत्र में राज्य के 5277 स्कूलों में आईसीटी लैब स्थापित हो जाएगी। अभी 1987 सरकारी स्कूलों में आईसीटी लैब चल रही है। इनमें 1,203 विद्यालय प्रारंभिक एवं 784 उच्च माध्यमिक विद्यालय हैं। इन स्कूलों में आईसीटी लैब बूट मॉडल में संचालित हैं। इसका मकसद डिजिटल शिक्षा और स्मार्ट क्लास को बढ़ावा देना है।
6113 उच्च माध्यमिक में स्मार्ट क्लास शुरू होगी
शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने बताया कि 2025-26 में 5277 और स्कूलों में आईसीटी लैब एवं 6113 उच्च माध्यमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास स्थापित किये जा रहे हैं। अभी 2,739 प्रारंभिक विद्यालयों में 5,478 स्मार्ट क्लास चल रहे हैं। वर्ष 2024-25 में 4,621 माध्यमिक विद्यालयों में इंटीग्रेटेड साइंस लैब की स्थापना की गयी है। इनमें से 4,563 विद्यालयों में कार्य पूर्ण हो चुका है।
सामग्री की आपूर्ति की गई
इस वर्ष 3,991 माध्यमिक विद्यालयों में इंटीग्रेटेड साइंस लैब की स्थापना के लिए सामग्री की आपूर्ति हो चुकी है। इनमें से 1,529 विद्यालयों में लैब अधिष्ठापन का कार्य पूरा हो चुका है। 76 उच्च माध्यमिक विद्यालयों में अटल टिकरिंग लैब एवं रोबोटिक्स की स्थापना की गयी है।
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