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2026 में ये टिप्स अपनाएं कभी भी नहीं होगा पैसो की कमी

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By arcarrierpoint

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2026 में ये टिप्स अपनाएं कभी भी नहीं होगा पैसो की कमी

2026 में ये टिप्स अपनाएं कभी भी नहीं होगा पैसो की कमी:-नया साल 2026 सिर्फ तारीख बदलने का नाम नहीं है, बल्कि यह अपने वित्तीय भविष्य (Financial Future) को मजबूत करने का सुनहरा अवसर भी है। आज के समय में महंगाई, अनिश्चित नौकरी, मेडिकल खर्च और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण पैसों की कमी सबसे बड़ी चिंता बन गई है। लेकिन अगर आप 2026 की शुरुआत सही फाइनेंशियल प्लानिंग के साथ करते हैं, तो जीवन में कभी भी पैसों की तंगी नहीं आएगी।

इस आर्टिकल में हम आपको बताएंगे वे प्रैक्टिकल और भरोसेमंद टिप्स, जिन्हें अपनाकर आप न सिर्फ अपने वर्तमान को सुरक्षित कर सकते हैं, बल्कि भविष्य को भी मजबूत बना सकते हैं।

ये कदम आपका आज सुरक्षित करते हैं और भविष्य बनाते हैं|

नया साल अपनी आर्थिक सेहत को मजबूत करने का सही समय है। सही बचत, समझदारी भरा निवेश, पर्याप्त बीमा और कर्ज पर नियंत्रण ये सात कदम आपको आज सुरक्षित रखते हैं और कल के लिए तैयार करते हैं। 2026 की शुरुआत पर इन्हीं फाइनेंशियल सिद्धांतों से मजबूत भविष्य की नींव रखें।

नया साल फाइनेंशियल सेफ्टी नेट बनाने का सही समय है। ऐसा फंड जो छंटनी, बीमारी, बिजनेस स्लोडाउन या किसी इमरजेंसी में 6-15 माह का खर्च संभाल सके।

  • अगर आपका जरूरी मासिक खर्च (जैसे – किराया, राशन, स्कूल फीस, बेसिक बिल) 60,000 रुपए है, तो कम से कम 3.6 लाख रुपए (6 महीने) से लेकर 9 लाख रुपए (15 महीने) तक का इमरजेंसी फंड अलग रखना समझदारी।

नए साल में उच्च ब्याज वाले कर्ज जैसे क्रेडिट कार्ड बकाया या पर्सनल लोन को खत्म करने की कोशिश करें। बेवजह कर्ज से बचें। जब ब्याज में जाने वाला हिस्सा घटेगा, तो सैलरी या आय का बड़ा हिस्सा आपकी बचत और निवेश में जा सकेगा।

  • आज छोटे-मोटे सुख (फालतू शॉपिंग, महंगे गैजेट) को थोड़ा रोककर बड़े लक्ष्यों (रिटायरमेंट, घर, बच्चों की शिक्षा, फाइनेंशियल फ्रीडम) पर फोकस कीजिए।

रिटायरमेंट प्लानिंग का लक्ष्य ऐसा कॉर्पस बनाना है, जिससे रिटायरमेंट के बाद खर्च और मेडिकल जरूरतें आराम से पूरी हों। 4% रूल के मुताबिक, हर साल कॉर्पस का लगभग 4% निकाला जा सकता है ताकि पैसा लंबे समय तक चले।

  • अगर रिटायरमेंट में 1 लाख रुपए महीना चाहिए, तो सालाना खर्च 12 लाख हुआ। 12 लाख 0.04 करीब 3 करोड़ रुपए का रिटायरमेंट कॉर्पस जरूरी।

मार्केट कब उठेगा, कब नीचे, ये अनुमान लगाने से बेहतर है कि हर महीने तय तारीख को निश्चित रकम निवेश करें। मान लीजिए आप 5,000 रुपए से मासिक एसआईपी शुरू करते हैं। हर साल 10% बढ़ोतरी करते हैं। 15 वर्ष में 15.3 लाख रुपए निवेश होंगे।

  • 15% सालाना रिटर्न मानें, तो यह रकम लगभग 45 लाख रुपए तक बढ़ सकती है। यानी छोटी रकम और अनुशासन से बड़ा – कॉर्पस बनना संभव है।

अगर बड़ा फंड है और उससे नियमित आय चाहते हैं, तो सिस्टमैटिक विड्रॉल प्लान उपयोगी है। मान लें आपके पास 1 करोड़ हैं। इसे म्यूचुअल फंड में निवेश कर हर माह 1 लाख निकालना शुरू करते हैं। सालाना निकासी 10% बढ़ाते हैं। अगर फंड पर औसतन 12% सालाना रिटर्न मिलता है।

  • यह एसडब्ल्यूपी 10 साल तक चलेगा। 10 साल लगातार पैसा निकालने के बाद भी 5.9 लाख का कॉर्पस बचा रह सकता है।

जो पैसा आए, पहले खुद को ‘पे’ कीजिए। यानी बचत-निवेश। मान लीजिए मासिक आय 75,000 है। आप 37,500 (50%) शुरुआत में ही अलग रख देते हैं, फिर बाकी से खर्च चलाते हैं।

  • हाई-सेविंग आदत वित्तीय आजादी और जल्दी रिटायर जैसे लक्ष्यों के लिए बहुत प्रभावी है और यह महज 10 से 15 साल में फाइनेंशियल इंडिपेंडेंस का रास्ता खोल सकती है।

हेल्थ इंश्योरेंसः सही हेल्थ कवर मेडिकल इमरजेंसी में आपकी बचत और निवेश को सुरक्षित रखता है। सम-इंश्योर्ड, वेटिंग पीरियड, नेटवर्क हॉस्पिटल, डे-केयर कवर और ब्लेम सेटलमेंट रिकॉर्ड जरूर जांचें। टर्म इंश्योरेंसः आपकी गैरमौजूदगी में परिवार की आर्थिक सुरक्षा के लिए जरूरी है। आम तौर पर टर्म कवर आपकी सालाना आय का 10-15 गुना होना चाहिए। अपने लक्ष्य से 15 साल अधिक टर्म का प्लान लें।

इमरजेंसी फंड, छोटी ट्रिप, सालाना प्रीमियम, छोटा गैजेट, छोटी गाड़ी आदि जैसे लक्ष्यों – के लिए बहुत ज्यादा रिस्क न लेने वाले विकल्प ठीक रहते हैं: – जैसे लिक्विड या बहुत कम अवधि वाले डेट फंड, आर्बिट्रेज या इक्विटी सेविंग फंड आदि।

कार अपग्रेड, घर की डाउनपेमेंट, बच्चों की शुरुआती पढ़ाई, शादी की तैयारी, घर की बड़ी मरम्मत या छोटे बिजनेस के लिए पूंजी ऐसे लक्ष्यों के लिए बैलेंस्ड अप्रोच जरूरी है। यानी – थोड़ा ग्रोथ, थोड़ी स्थिरता यहां बैलेंस्ड एडवांटेज, एग्रेसिव हाइब्रिड जैसे हाइब्रिड फंड सही रह सकते हैं।

लोन मिलने के बाद वह समय सीमा (आमतौर पर 3 से 15 दिन) जिसके भीतर आप बिना भारी जुर्माने के अपना लोन कैसिल कर सकते हैं। इसे ‘लुक-अप पीरियड’ भी कहते हैं।

  • प्रोसेसिंग फीसः- लगभग सभी बैंक लोन कैंसिल करने पर भी प्रोसेसिंग फीस, स्टैम्प ड्यूटी और जीएसटी वापस नहीं करते।
  • ब्याजः- कुछ बैंक लोन मिलने से लेकर कैंसल करने तक के दिनों का ब्याज वसूलते हैं।
  • समय सीमाः- अगर कूलिंग ऑफ पीरियड निकल गया है, तो कैंसिलेशन चार्ज काफी बढ़ सकते हैं। लोन लेते वक्त अपनी बैंक पॉलिसी में लुक-अप पीरियड चेक करें।

भारत में सोना रखने की कोई तय कानूनी सीमा नहीं है। शर्त सिर्फ यह है कि वह वैध आय, उपहार या विरासत से मिला हो और जरूरत पड़ने पर उसका स्रोत बताया जा सके। विवाहित महिला 500 ग्राम, अविवाहित महिला 250 ग्राम और पुरुष 100 ग्राम सोना रख सकते हैं।

इस हिसाब से पति-पत्नी और एक अविवाहित बेटी वाले परिवार के पास कुल 850 ग्राम सोना कानूनी रूप से घर में रखा जा सकता है। हालांकि, तय सीमा से ज्यादा सोना रखने पर खरीद, उपहार या विरासत के दस्तावेज जरूरी हैं। बिना स्रोत बताए ज्यादा सोना मिलने पर अघोषित आय माना जा सकता है।

अगर आप 2026 में:-

  • इमरजेंसी फंड बनाते हैं
  • कर्ज से दूरी रखते हैं
  • SIP और इंश्योरेंस अपनाते हैं
  • खर्च पर नियंत्रण रखते हैं
  • आय के नए स्रोत बनाते हैं

तो पैसों की कमी कभी नहीं होगी और आपका भविष्य पूरी तरह सुरक्षित रहेगा।

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यह वेबसाइट Sumit Sir के निर्देशन में संचालित है। इस बेवसाइट पर सही और सटीक जानकारी सबसे पहले उपलब्ध कराया जाता है। सुमित सर के पास पिछले पांच साल से ऑनलाइन और ऑफलाइन पढाने का अनुभव है। धन्यवाद।

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