मैट्रिक इंटर परीक्षा सेंटर पर संकट- देखिए कैसा होगा आपका परीक्षा सेंटर:-बिहार में मैट्रिक (10वीं) और इंटर (12वीं) की परीक्षाओं को लेकर एक बड़ी और अहम खबर सामने आई है। शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय बैठक के बाद यह स्पष्ट कर दिया गया है कि अब मैट्रिक और इंटर परीक्षा के लिए पूरे कॉलेज को परीक्षा केंद्र नहीं बनाया जाएगा।
इस फैसले से लाखों छात्रों के मन में यह सवाल है कि अब उनका परीक्षा केंद्र कैसा होगा, बैठने की व्यवस्था, चेकिंग और अनुशासन में क्या बदलाव आएगा।
इस लेख में हम विस्तार से बताएंगे—
- परीक्षा केंद्र पर संकट क्यों आया
- नया निर्णय क्या है
- छात्रों को क्या परेशानी हो सकती है
- परीक्षा केंद्र पर क्या-क्या बदलेगा
- छात्रों को किन बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए
मैट्रिक व इंटर परीक्षा के लिए नहीं लिया जाएगा पूरा कॉलेज
मैट्रिक और इंटर परीक्षा के लिए बीआरएबीयू समेत किसी भी विश्वविद्यालय के कॉलेजों का पूरा अधिग्रहण नहीं किया जायेगा। पटना में हुई विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों की बैठक में शिक्षा विभाग ने यह निर्देश दिया। तीन दिन पहले राजभवन में सभी कुलसचिवों को बैठक के लिए बुलाया गया था।
बैठक से लौटकर बी आरएबीयू के रजिस्ट्रार प्रो. समीर कुमार शर्मा ने बताया कि
विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों ने बैठक में कहा कि पूरे कॉलेज के अधिग्रहण से विश्वविद्यालय की परीक्षाएं और कक्षाएं बाधित हो जाती हैं। मैट्रिक और इंटर परीक्षाओं के अलावा प्रशासन कई अन्य कार्यक्रमों के लिए कॉलेज का अधिग्रहण कर लेता है। इससे कई दिनों तक पढ़ाई ठप हो जाती है। कुलसचिवों की मांग पर शिक्षा विभाग ने आश्वस्त किया कि अब कॉलेजों के पूरे भवनों को नहीं लिया जायेगा। केवल उतना ही हिस्सा लिया जायेगा, जितने से कॉलेजों में कक्षा और परीक्षा में कोई बाधा नहीं हो।
प्रशासनिक काम में टूट रहे कॉलेज के फर्नीचर
बैठक में कुलसचिवों ने प्रशासनिक कामों में कॉलेजों के फर्नीचर टूटने की शिकायत भी की। बिहार विधानसभा चुनाव में टूटे फर्नीचर से हुए नुकसान की सूची भी कुलसचिवों ने राजभवन को सौंपी। बीआरएबीयू ने लगभग पांच लाख रुपये के फर्नीचर नुकसान की सूची राजभवन को सौंपी।
विश्वविद्यालयों का कहना था कि
प्रशासनिक कामों में कॉलेज के फर्नीचर का नुकसान हो जाता है और इसके बाद हम पर वित्तीय बोझ बढ़ जाता है। पिछले दिनों बीआरएबीयू के सभी कॉलेजों से विवि प्रशासन ने बिहार विधानसभा चुनाव में कितनी राशि के फर्नीचर का नुकसान हुआ, इसकी रिपोर्ट मांगी थी। बैठक में विश्वविद्यालयों ने कहा कि प्रशासन के द्वारा कॉलेजों का अधिग्रहण करने से लगभग दो महीने की पढ़ाई छूट जाती है। इससे छात्रों का सिलेबस नहीं पूरा हो पाता है।
- विश्वविद्यालयों की मांग पर शिक्षा विभाग ने लिया निर्णय
- प्रशासनिक कामों के लिए अब नहीं लिये जाएंगे कॉलेज
मैट्रिक और इंटर परीक्षा के लिए बोर्ड ने बनाई 38 उड़नदस्ता टीम
मैट्रिक और इंटर परीक्षा के लिए बिहार बोर्ड की ओर से 38 उड़नदस्ता टीम बनाई गई है। सभी जिलों के लिए 38 अधिकारी प्रतिनियुक्त किए गए हैं। इंटर की परीक्षा दो फरवरी से होनी है। मैट्रिक-इंटर परीक्षा में बिहार विद्यालय परीक्षा समिति की ओर से अलग से इनकी टीम बनाई जाती है। इस टीम को अलग से अपनी रिपोर्ट बोर्ड को भेजनी होती है।
बोर्ड ने सभी को 31 जनवरी से संबंधित जिलों में ही कैंप करने का निर्देश दिया है।
जिले में रामबाग टीचर ट्रेनिंग कॉलेज के व्याख्याता डॉ. निर्मल कुमार प्रतिनियुक्त किए गए हैं। उड़नदस्ता अधिकारी को हर दिन परीक्षा की मॉनिटरिंग के साथ ही प्रश्नपत्र की निकासी, समय से केन्द्र पर पहुंचने से संबंधित रिपोर्ट देनी है। जिले के वरीय अधिकारियों से समन्वय कर यह भी देखेंगे कि पुलिस पदाधिकारी और मजिस्ट्रेट समय पर केन्द्र पर पहुंचे हैं या नहीं। भ्रमण के दौरान प्रतिनियुक्त सुरक्षाकर्मी या अन्य कर्मी के व्यवहार की भी निगरानी करेंगे और संदिग्ध पाए जाने पर तुरंत इसकी सूचना देंगे।
क्यों आया मैट्रिक–इंटर परीक्षा केंद्र पर संकट?
राज्य शिक्षा विभाग और विश्वविद्यालयों के कुलसचिवों की बैठक में यह बात सामने आई कि—
- कॉलेजों में पहले से प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्य चल रहे होते हैं
- पूरे कॉलेज को परीक्षा केंद्र बनाने से
- कक्षाओं की पढ़ाई बाधित होती है
- विश्वविद्यालयी परीक्षाओं में समस्या आती है
- प्रशासनिक कार्य ठप हो जाते हैं
इसी कारण शिक्षा विभाग ने बड़ा निर्णय लिया कि अब मैट्रिक और इंटर परीक्षा के लिए पूरा कॉलेज अधिग्रहित नहीं किया जाएगा।
अब परीक्षा केंद्र कैसा होगा? (New Exam Center System)
नई व्यवस्था के अनुसार—
- कॉलेज का पूरा परिसर परीक्षा केंद्र नहीं बनेगा
- केवल
- चुने हुए भवन / ब्लॉक / कमरे
को ही परीक्षा केंद्र बनाया जाएगा
- चुने हुए भवन / ब्लॉक / कमरे
- बाकी हिस्सों में
- कॉलेज का प्रशासन
- विश्वविद्यालयी कार्य
- नियमित कक्षाएं
चलती रहेंगी
यानी अब परीक्षा केंद्र सीमित क्षेत्र में होगा, पूरा कॉलेज बंद नहीं रहेगा।
क्या छात्रों को होगी परेशानी?
शुरुआती दौर में छात्रों को कुछ परेशानियां हो सकती हैं—
संभावित समस्याएं:-
- कम कमरों में ज्यादा परीक्षार्थी
- बैठने की जगह सीमित
- गेट पर सख्त जांच
- समय से पहले प्रवेश की बाध्यता
लेकिन शिक्षा विभाग का कहना है कि—
“छात्रों की सुविधा और परीक्षा की पवित्रता से कोई समझौता नहीं होगा।”
परीक्षा केंद्र पर सुरक्षा और चेकिंग कैसी होगी?
इस बार परीक्षा केंद्रों पर अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था की जा रही है—
सुरक्षा के मुख्य बिंदु:-
- तीन स्तर की जांच
- मोबाइल, स्मार्ट वॉच, ब्लूटूथ पूर्ण प्रतिबंध
- CCTV कैमरे से निगरानी
- केंद्राधीक्षक + दंडाधिकारी + पुलिस बल तैनात
OMR और उत्तर पुस्तिका पर:-
- बारकोड सिस्टम
- रियल-टाइम रिपोर्टिंग
- किसी भी गड़बड़ी पर तत्काल कार्रवाई
38 उड़नदस्ता टीमों का गठन – क्या है भूमिका?
बिहार बोर्ड ने इस बार 38 उड़नदस्ता (Flying Squad) टीम बनाई है—
- हर जिला कवर किया जाएगा
- अचानक परीक्षा केंद्र पर छापेमारी
- नकल या अव्यवस्था मिलने पर
- तुरंत रिपोर्ट
- केंद्र पर कार्रवाई
इसका सीधा असर यह होगा कि नकल पर पूरी तरह लगाम लगेगी।
छात्रों के लिए जरूरी निर्देश (बहुत ध्यान दें)
अगर आप मैट्रिक या इंटर परीक्षा दे रहे हैं, तो इन बातों को गांठ बांध लें—
परीक्षा से पहले:-
- एडमिट कार्ड अच्छी तरह जांच लें
- परीक्षा केंद्र का पता पहले जाकर देख लें
- समय से कम से कम 1 घंटा पहले पहुंचें
परीक्षाके दिन:-
- केवल
- एडमिट कार्ड
- पेन
- आवश्यक दस्तावेज
लेकर जाएं
- मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट बिल्कुल न लाएं
परीक्षा केंद्र पर:-
- निर्देशों का पालन करें
- घबराएं नहीं
- किसी भी समस्या में केंद्राधीक्षक से बात करें
निष्कर्ष (Final Conclusion)
मैट्रिक और इंटर परीक्षा केंद्र को लेकर जो संकट की स्थिति दिख रही है, वह अस्थायी है। शिक्षा विभाग का नया फैसला—
- परीक्षा को ज्यादा पारदर्शी बनाएगा
- नकल पर रोक लगाएगा
- सिस्टम को मजबूत करेगा
छात्रों को घबराने की जरूरत नहीं है, बल्कि नए नियमों के अनुसार खुद को तैयार करना ही सबसे समझदारी है।
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