मैट्रिक का प्रैक्टिकल परीक्षा शुरू | बस ये काम करें मिलेगा 40 में 40:-बिहार बोर्ड सहित देश के कई बोर्डों में मैट्रिक (10वीं) की प्रैक्टिकल परीक्षा शुरू हो चुकी है। बहुत-से छात्र प्रैक्टिकल को हल्के में ले लेते हैं, जबकि यही परीक्षा फुल मार्क्स (40 में 40) लाने का सबसे आसान मौका होती है।
अगर आप सही तरीके से तैयारी करें और कुछ जरूरी नियमों का पालन करें, तो साइंस और सोशल साइंस दोनों विषयों में पूरे अंक पाना बिल्कुल संभव है।
इस आर्टिकल में हम विस्तार से जानेंगे—
- प्रैक्टिकल परीक्षा कैसे होती है
- साइंस प्रैक्टिकल में 20 में 20 कैसे लाएँ
- सोशल साइंस प्रैक्टिकल में 20 में 20 कैसे लाएँ
- परीक्षा अटेंड करते समय किन नियमों का ध्यान रखें
- कौन-सी गलती करने से नंबर कटते हैं
मैट्रिक प्रैक्टिकल परीक्षा क्यों है बहुत जरूरी?
मैट्रिकपरीक्षा में प्रैक्टिकल का सीधा असर आपके फाइनल रिजल्ट और डिवीजन पर पड़ता है।
- कई छात्रों की थ्योरी में थोड़ी कमजोरी होती है
- प्रैक्टिकल के अच्छे अंक कुल प्रतिशत बढ़ा देते हैं
- प्रैक्टिकल में फेल होने पर रिजल्ट भी प्रभावित हो सकता है
इसलिए प्रैक्टिकल को कभी हल्के में न लें।
मैट्रिक प्रैक्टिकल परीक्षा का पैटर्न (संक्षेप में)
| विषय | कुल अंक | इंटरनल / प्रैक्टिकल |
|---|---|---|
| साइंस | 20 | 10 + 10 |
| सोशल साइंस | 20 | 10 + 10 |
ध्यान दें: कई बोर्डों में इंटरनल असेसमेंट + प्रैक्टिकल/प्रोजेक्ट मिलाकर 40 अंक होते हैं।
साइंस प्रैक्टिकल में 20 में 20 कैसे प्राप्त करें?
साइंस प्रैक्टिकल में आमतौर पर ये हिस्से होते हैं—
प्रैक्टिकल फाइल (Lab Copy)
- फाइल पूरी और साफ-सुथरी होनी चाहिए
- सभी प्रयोग (Experiments) लिखे हों
- डायग्राम साफ और लेबल सही हों
- शिक्षक के साइन जरूर हों
टिप: अधूरी फाइल होने पर सीधे 3–5 नंबर कट जाते हैं।
प्रयोग (Experiment) करते समय क्या करें?
- प्रयोग से पहले पूरा ध्यान से सुनें
- जो पूछा जाए वही करें
- जल्दबाजी न करें
- गलती होने पर घबराएँ नहीं
शिक्षक बच्चे का कॉन्फिडेंस और तरीका भी देखते हैं।
Viva (मौखिक प्रश्न)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल—
- यह प्रयोग क्यों किया जाता है?
- इसमें कौन-सा नियम / सिद्धांत लगता है?
- इसका उपयोग क्या है?
उत्तर छोटे लेकिन स्पष्ट दें
अटकने पर मनगढ़ंत जवाब न दें
सोशल साइंस प्रैक्टिकल में 20 में 20 कैसे लाएँ?
बहुत-से छात्र सोचते हैं कि सोशल साइंस में प्रैक्टिकल क्या होता है, लेकिन यहां भी पूरे नंबर मिलते हैं।
प्रोजेक्ट / प्रैक्टिकल फाइल
सोशल साइंस में प्रोजेक्ट में ये बातें जरूरी होती हैं—
- कवर पेज सुंदर और साफ
- विषय से संबंधित कंटेंट
- चार्ट / मैप / चित्र
- अपनी भाषा में लिखा हुआ
कॉपी-पेस्ट प्रोजेक्ट से बचें, शिक्षक पहचान लेते हैं।
मैप वर्क / चार्ट वर्क
- मैप साफ हो
- सही लेबलिंग हो
- रंग हल्के और स्पष्ट हों
गलत लेबल = सीधे नंबर कट।
Viva / सवाल-जवाब
सवाल आमतौर पर प्रोजेक्ट से ही पूछे जाते हैं—
- आपने यह विषय क्यों चुना?
- इसमें क्या सीख मिली?
- इसका समाज में क्या महत्व है?
अपने शब्दों में आत्मविश्वास से जवाब दें।
परीक्षा अटेंड करते समय ये नियम जरूर मानें
- समय से पहले केंद्र पहुँचें
- स्कूल ड्रेस में जाएँ
- एडमिट कार्ड और आईडी साथ रखें
- मोबाइल फोन बिल्कुल न ले जाएँ
- शिक्षक के निर्देश ध्यान से सुनें
देर से पहुँचने पर परीक्षा से बाहर भी किया जा सकता है।
किन गलतियों से नंबर कटते हैं?
- अधूरी प्रैक्टिकल फाइल
- गंदा और अव्यवस्थित काम
- Viva में चुप रह जाना
- अनुशासनहीन व्यवहार
- नकल करने की कोशिश
एक छोटी गलती पूरे नंबर बिगाड़ सकती है।
प्रैक्टिकल परीक्षा से पहले बच्चों के लिए अंतिम सलाह
- एक दिन पहले फाइल जरूर चेक करें
- प्रयोग को घर पर दोहराएँ
- ज्यादा तनाव न लें
- आत्मविश्वास रखें
याद रखें—
प्रैक्टिकल परीक्षा डरने की नहीं, पूरे अंक लेने की होती है।
निष्कर्ष
मैट्रिक की प्रैक्टिकल परीक्षा छात्रों के लिए सुनहरा अवसर है। अगर आप ऊपर बताए गए तरीकों को अपनाते हैं, तो साइंस और सोशल साइंस दोनों में 40 में 40 अंक लाना बिल्कुल संभव है।
अगर यह जानकारी आपको उपयोगी लगी हो, तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें ताकि सभी बच्चे अच्छे नंबर ला सकें।
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