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बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं अर्द्धवार्षिक परीक्षा 2026 | गृह विज्ञान(Homescience) का प्रश्नपत्र उत्तर सहित

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बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं अर्द्धवार्षिक परीक्षा 2026 | गृह विज्ञान(Homescience) का प्रश्नपत्र उत्तर सहित

बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं अर्द्धवार्षिक परीक्षा 2026- इस पोस्ट के माध्यम से कक्षा 12वीं अर्द्धवार्षिक परीक्षा 2026 के Home Science विषय के प्रश्न पत्र का PDF डाउनलोड कर सकते हैं। इसके साथ-साथ Objective और Subjective प्रश्नों का उत्तर भी उपलब्ध कराया जाएगा। अगर आप 12th Home Science Question Paper 2026 PDF, Home Science Answer Key 2026 या Home Science Question Answer PDF खोज रहे हैं, तो आपको इन सभी की जानकारी इसी पोस्ट में मिलेगी।

बिहार बोर्ड कक्षा 12वीं की अर्द्धवार्षिक परीक्षा 2026 का आयोजन 18 सितंबर से 26 सितंबर 2026 तक किया जा रहा है। गृह विज्ञान (Home Science) की परीक्षा 26 सितंबर 2026 को प्रथम पाली में सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक निर्धारित है।

कक्षा 12वीं की अर्द्धवार्षिक परीक्षा का आयोजन विद्यालय स्तर पर निर्धारित व्यवस्था के अनुसार किया जाएगा। परीक्षा से संबंधित जानकारी और परीक्षा केंद्र के बारे में विद्यार्थियों को अपने विद्यालय से जानकारी प्राप्त करनी होगी।

विद्यार्थियों को परीक्षा में शामिल होने से पहले अपने स्कूल से परीक्षा की तारीख, समय और अन्य आवश्यक निर्देश जरूर प्राप्त कर लेना चाहिए।

कक्षा 12वीं की अर्द्धवार्षिक परीक्षा के एडमिट कार्ड को लेकर विद्यार्थियों को अपने विद्यालय के निर्देश का पालन करना चाहिए। यह परीक्षा मुख्य इंटर बोर्ड परीक्षा से अलग होती है।

अगर विद्यालय की तरफ से परीक्षा के लिए कोई परीक्षा पर्ची, पहचान-पत्र या अन्य आवश्यक दस्तावेज लाने के लिए कहा जाता है, तो उसे परीक्षा के समय अपने साथ जरूर लेकर जाएं।

कक्षा 12वीं अर्द्धवार्षिक परीक्षा 2026 का प्रश्नपत्र निर्धारित पाठ्यक्रम के आधार पर तैयार किया जाएगा। विद्यार्थियों को परीक्षा की तैयारी करते समय केवल कुछ चुनिंदा या वायरल प्रश्नों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए।

गृह विज्ञान विषय के पूरे निर्धारित सिलेबस को अच्छी तरह से पढ़ना चाहिए। गृह विज्ञान में पोषण, स्वास्थ्य, परिवार एवं संसाधन प्रबंधन, वस्त्र एवं परिधान तथा संबंधित अध्यायों से प्रश्न पूछे जा सकते हैं।

कक्षा 12वीं अर्द्धवार्षिक परीक्षा की कॉपियों की जांच एवं मूल्यांकन से संबंधित व्यवस्था विद्यालय/शिक्षा विभाग द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार की जाएगी। विद्यार्थियों को परीक्षा में सभी प्रश्नों का उत्तर साफ-साफ और निर्धारित तरीके से लिखना चाहिए।

SESSION2026-27
SUBJECT/CODEHome Science -319
SITTING1st SHIFT
EXAM DATE26-09-2026
TIME09:30 AM-12:45 PM
EXAMHalf Yearly Exam 2026
QUESTION PAPERHome Science Question Paper
ANSWERObjective + Subjective

कक्षा 12वीं गृह विज्ञान अर्द्धवार्षिक परीक्षा समाप्त होने के बाद विद्यार्थियों को अपने Objective Questions के सही उत्तर जानने की जरूरत होती है। इसलिए प्रश्नपत्र उपलब्ध होने के बाद यहां Home Science Objective Answer Key 2026 भी अपडेट की जाएगी।

नीचे दिए गए लिंक से आप गृह विज्ञान विषय के Subjective प्रश्न और उनके उत्तर PDF फॉर्मेट में डाउनलोड कर सकते हैं।

1. नवजात शिशु (Newborn baby): नवजात शिशु (Newborn Baby) जन्मांध या जन्म से लेकर 28 दिन (4 सप्ताह) तक की उम्र के बच्चे को कहा जाता है। इस चरण में शिशु को माँ के गर्भ से बाहर की दुनिया के वातावरण में ढलना पड़ता है। नवजात शिशु की त्वचा बहुत नाजुक होती है, और उसे सही तापमान (गर्माहट), माँ के दूध (स्तनपान) तथा संक्रमण से सुरक्षा की बहुत ज्यादा जरूरत होती है। जन्म के तुरंत बाद रोना और माँ का पहला दूध (कोलोस्ट्रम) पाना उसके स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी होता है।

2. घर पर प्रसव के लाभ (Advantages of Home Delivery):

  1. परिचित और आरामदायक माहौल: महिला अपने घर के जाने-पहचाने और आरामदायक माहौल में रहती है, जिससे तनाव और घबराहट कम होती है।
  2. परिवार का सहयोग: प्रसव के दौरान परिवार के सदस्य लगातार महिला के पास रहकर भावनात्मक सहारा दे सकते हैं।
  3. कम खर्चीला (आर्थिक बचत): अस्पताल की तुलना में घर पर प्रसव का खर्च काफी कम होता है।
  4. व्यक्तिगत देखभाल: घर पर महिला को निरंतर और व्यक्तिगत ध्यान (Personal Care) मिलता है।

3. आहार आयोजन (Meal Planning)

आहार आयोजन का अर्थ है परिवार के सभी सदस्यों की आयु, लिंग, स्वास्थ्य और शारीरिक श्रम के अनुसार उनके भोजन में सभी आवश्यक पोषक तत्वों को सही मात्रा में शामिल करने की योजना बनाना।

  • मुख्य उद्देश्य:
    • परिवार को संतुलित आहार (Balanced Diet) प्रदान करना।
    • समय, ऊर्जा और धन की बचत करना।
    • भोजन में विविधता लाना ताकि खाना स्वादिष्ट और आकर्षक लगे।

4. मिलावट (Adulteration)

खाद्य पदार्थों में मुनाफा कमाने के उद्देश्य से किसी सस्ती, अमानक या हानिकारक वस्तु को मिलाना या उनमें से पोषक तत्वों को निकाल लेना मिलावट कहलाता है।

  • उदाहरण: दूध में पानी या डिटर्जेंट मिलाना, काली मिर्च में पपीते के बीज मिलाना, या हल्दी में रासायनिक पीला रंग मिलाना।
  • प्रभाव: इससे भोजन की गुणवत्ता और पौष्टिकता कम हो जाती है, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक है।

5. प्रमाणन चिह्न (Certification Mark)

प्रमाणन चिह्न किसी अधिकृत संस्था द्वारा किसी उत्पाद (Product) पर दिया गया वह प्रतीक या मार्का होता है, जो यह गारंटी देता है कि वह उत्पाद सुरक्षा, शुद्धता और गुणवत्ता के सभी निर्धारित मानकों को पूरा करता है।

  • उदाहरण: ISI मार्क (औद्योगिक उत्पादों के लिए), AGMARK (कृषि एवं खाद्य उत्पादों के लिए), FSSAI, और हॉलमार्क (सोने-चांदी के लिए)।
  • महत्व: यह उपभोक्ताओं को नकली या घटिया सामान से बचाता है और सही गुणवत्ता का भरोसा देता है।

6. नवजात शिशु के वस्त्र (Clothing of Newborn Baby)

नवजात शिशु की त्वचा बहुत नाजुक और संवेदनशील होती है, इसलिए उसके वस्त्र चुनते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  • सॉफ्ट और आरामदायक: कपड़े सूती (Cotton), ढीले, नरम और आरामदायक होने चाहिए।
  • मौसम के अनुकूल: सर्दी में शिशु को गर्म रखने वाले और गर्मी में हवादार सूती कपड़े पहनाने चाहिए।
  • पहनने में आसान: कपड़ों में ज़िपर, बटन या कसकर बांधने वाली डोरी नहीं होनी चाहिए ताकि बच्चे को कोई चोट या चुभन न हो।
  • स्वच्छता: कपड़े हमेशा साफ, धुले हुए और कीटाणुरहित (Disinfected) होने चाहिए।

7. स्तनपान के लाभ (Benefits of Breastfeeding)

स्तनपान शिशु और माँ दोनों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक होता है:

  • पूर्ण पोषण: माँ का दूध (विशेषकर शुरुआती पीला गाढ़ा दूध यानी कोलोस्ट्रम) नवजात शिशु के लिए संपूर्ण और सर्वोत्तम आहार है, जिसमें सभी आवश्यक पोषक तत्व होते हैं।
  • रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity): इसमें मौजूद एंटीबॉडीज शिशु को विभिन्न संक्रमणों और बीमारियों से बचाते हैं।
  • पाचन में आसान: यह आसानी से पच जाता है और शिशु को पेट संबंधी समस्याओं से सुरक्षित रखता है।
  • माँ के लिए लाभ: स्तनपान कराने से माँ के शरीर को प्रसव के बाद तेज़ी से ठीक होने में मदद मिलती है और गंभीर बीमारियों का खतरा कम होता है।

8. प्रसव के बाद माँ की तत्काल देखभाल (Immediate care of the mother after delivery)

प्रसव (Delivery) के तुरंत बाद माँ के स्वास्थ्य की निगरानी करना बेहद आवश्यक होता है:

  • शारीरिक निगरानी: माँ के रक्तचाप (BP), नाड़ी (Pulse), तापमान और अत्यधिक रक्तस्राव (Bleeding) की जाँच करना।
  • पर्याप्त आराम एवं पोषण: माँ को शारीरिक और मानसिक आराम देना और ऊर्जा पुनः प्राप्त करने के लिए हल्का व पौष्टिक आहार/तरल पदार्थ देना।
  • तत्काल स्तनपान: प्रसव के तुरंत बाद (आधे से एक घंटे के भीतर) माँ को नवजात शिशु को स्तनपान शुरू कराना चाहिए।
  • संक्रमण से बचाव: प्रसव के बाद स्वच्छता (Hygiene) का विशेष ध्यान रखना ताकि किसी भी तरह के संक्रमण (Infection) से बचा जा सके।

9. जीवाणु (Bacteria)

जीवाणु (Bacteria) सूक्ष्मदर्शी (Microscopic) और एककोशिकीय (Single-celled) जीव होते हैं जो हमारे वातावरण में हर जगह मौजूद रहते हैं।

  • उपयोगी जीवाणु: कुछ जीवाणु हमारे लिए लाभदायक होते हैं, जैसे दही जमाने वाले जीवाणु (लैक्टोबैसिलस) और पाचन तंत्र में मदद करने वाले जीवाणु।
  • हानिकारक जीवाणु: कुछ जीवाणु भोजन को खराब करते हैं और बीमारियों (जैसे- हैजा, टाइफाइड, टीबी आदि) का कारण बनते हैं।

10. संतुलित भोजन (Balanced diet)

संतुलित भोजन (या संतुलित आहार) वह आहार है जिसमें शरीर के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्व—जैसे कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, वसा (Fat), विटामिन, खनिज लवण (Minerals), जल और रफेज (Fiber)—उचित और सही अनुपात में मौजूद होते हैं।

  • महत्व: यह शरीर को ऊर्जा प्रदान करता है, रोगों से रक्षा करता है तथा शारीरिक और मानसिक विकास के लिए आवश्यक है।

11. एगमार्क (AGMARK)

एगमार्क भारत सरकार द्वारा कृषि और खाद्य उत्पादों की गुणवत्ता और शुद्धता को प्रमाणित करने के लिए दिया जाने वाला एक गुणवत्ता चिह्न (Quality Mark) है।

  • उपयोग: यह तेल, घी, मसाले, शहद, अनाज और दालों जैसे कृषि आधारित उत्पादों पर लगाया जाता है।
  • लाभ: यह उपभोक्ताओं को शुद्ध और मिलावट-रहित खाद्य पदार्थ खरीदने का आश्वासन देता है।

12. नवजात शिशु की तात्कालिक देखभाल (Immediate care of the newborn baby)

जन्म के तुरंत बाद नवजात शिशु को सही देखभाल की आवश्यकता होती है:

  • श्वसन मार्ग साफ करना: जन्म लेते ही शिशु के मुँह और नाक से श्लेष्मा (Mucus) को साफ करना ताकि वह आसानी से साँस ले सके।
  • गर्भनाल (Umbilical Cord) काटना व बाँधना: रोगाणुरहित (Sterilized) कैंची से गर्भनाल को सही तरीके से बाँधकर काटना।
  • शरीर को गर्म रखना: शिशु के शरीर को पोंछकर सूखे व गर्म कपड़े में लपेटना (Kangaroo Mother Care या स्किन-टू-स्किन कॉन्टैक्ट) ताकि हाइपोथर्मिया (ठंड लगने) से बचाया जा सके।
  • तत्काल स्तनपान: जन्म के आधे से एक घंटे के भीतर माँ का पहला पीला दूध (कोलोस्ट्रम) पिलाना।

13. शिशु की मालिश (Massage of an infant)

शारीरिक और मानसिक विकास के लिए शिशु की नियमित तेल मालिश अत्यंत लाभदायक होती है:

  • मांसपेशियों और हड्डियों की मजबूती: मालिश से शिशु की हड्डियों और मांसपेशियों को ताकत मिलती है।
  • रक्त संचार (Blood Circulation): शरीर में रक्त का प्रवाह बेहतर होता है, जिससे शिशु का शारीरिक विकास तेजी से होता है।
  • अच्छी नींद और पाचन: मालिश से शिशु को शारीरिक आराम मिलता है, जिससे उसे अच्छी नींद आती है और गैस या पेट दर्द जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।

14. अस्पताल में प्रसव के लाभ (Advantages of hospital delivery)

अस्पताल (Institutional Delivery) में प्रसव कराने के निम्नलिखित प्रमुख लाभ हैं:

  • आपातकालीन चिकित्सा सुविधा: यदि प्रसव के दौरान कोई जटिलता (Complication) आती है, तो डॉक्टर और आवश्यक उपकरण (जैसे- ऑपरेशन या ऑक्सीजन) तुरंत उपलब्ध होते हैं।
  • प्रशिक्षित स्वास्थ्य कर्मियों की देखरेख: प्रसव अनुभवी डॉक्टरों और नर्सों की निगरानी में सुरक्षित रूप से होता है।
  • संक्रमण से सुरक्षा: अस्पताल में स्वच्छता और रोगाणुरहित वातावरण के कारण माँ और बच्चे को संक्रमण का खतरा कम रहता है।
  • तत्काल नवजात देखभाल: जन्म के तुरंत बाद शिशु को आवश्यक टीके (Vaccines) और आपातकालीन देखभाल आसानी से मिल जाती है।

15. रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity)

शरीर की विभिन्न प्रकार के सूक्ष्मजीवों (जैसे जीवाणु, विषाणु/वायरस) और बीमारियों से लड़ने की स्वाभाविक क्षमता को रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) कहते हैं।

  • प्रकार:
    1. प्राकृतिक (स्वाभाविक) प्रतिरक्षा: जो जन्म से ही शरीर में मौजूद होती है।
    2. उपार्जित (अर्जित) प्रतिरक्षा: जो टीकाकरण (Vaccination) या किसी बीमारी के संपर्क में आने के बाद विकसित होती है।
  • महत्व: यह शरीर के प्रतिरक्षा तंत्र (Immune System) को मजबूत बनाकर व्यक्ति को बार-बार बीमार पड़ने से बचाती है।

16. बी०सी०जी० (B.C.G.)

बी०सी०जी० (Bacillus Calmette–Guérin) एक प्रमुख टीका (Vaccine) है जो नवजात शिशुओं को तपेदिक या क्षय रोग (Tuberculosis – TB) से बचाने के लिए लगाया जाता है।

  • टीकाकरण का समय: यह टीका शिशु के जन्म के तुरंत बाद (या जन्म के 1 महीने के भीतर) बाईं बाँह के ऊपरी हिस्से में लगाया जाता है।
  • महत्व: यह बच्चों को टीबी जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी के संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करता है।

उत्तर: स्तनपान शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अति आवश्यक है। शिशु को स्तनपान कराते समय माँ को निम्नलिखित मुख्य सावधानियाँ बरतनी चाहिए:

  1. स्वच्छता (Hygiene):
    • स्तनपान कराने से पहले माँ को अपने हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए।
    • स्तन (Breast) और निप्पल (Nipple) को साफ और सूखे सूती कपड़े से साफ रखना चाहिए, ताकि शिशु को किसी प्रकार का संक्रमण न हो।
  2. सही स्थिति (Correct Posture & Latching):
    • माँ को आरामदायक स्थिति में बैठकर या लेटकर स्तनपान कराना चाहिए।
    • शिशु का सिर और शरीर एक सीधी रेखा में होना चाहिए। शिशु का मुँह पूरी तरह खुला होना चाहिए ताकि वह निप्पल के साथ-साथ उसके काले हिस्से (Areola) को भी मुँह में सही तरीके से ले सके।
  3. शिशु की नाक न दबे:
    • स्तनपान कराते समय इस बात का विशेष ध्यान रखें कि स्तन का दबाव शिशु की नाक पर न पड़े, जिससे उसे साँस लेने में तकलीफ हो। माँ अपनी उँगलियों से स्तन को थोड़ा दबाकर रख सकती हैं।
  4. डकार दिलाना (Burping):
    • स्तनपान के दौरान या तुरंत बाद शिशु को अपने कंधे से लगाकर उसकी पीठ को हल्के से सहलाना चाहिए ताकि वह डकार ले सके। इससे शिशु के पेट में फँसी हवा बाहर निकल जाती है और उल्टी/पेट दर्द की समस्या नहीं होती।
  5. दोनों स्तनों से बारी-बारी से दूध पिलाना:
    • शिशु को एक बार में एक ही स्तन से पूरी तरह दूध पीने देना चाहिए ताकि उसे शुरुआती पतला दूध (जो प्यास बुझाता है) और बाद का गाढ़ा दूध (जो पोषण और वसा देता है) दोनों मिल सके। अगली बार दूसरे स्तन से दूध पिलाना चाहिए।
  6. माँ का आहार एवं स्वास्थ्य:
    • स्तनपान कराने वाली माँ को खुद संतुलित और पौष्टिक आहार (हरी सब्जियाँ, दूध, फल, भरपूर पानी) लेना चाहिए।
    • माँ को बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि दवा का असर दूध के माध्यम से शिशु तक पहुँच सकता है।

उत्तर: घर पर सुरक्षित और स्वच्छ प्रसव (Home Delivery) कराने के लिए निम्नलिखित आवश्यक सामग्रियों की तैयारी पहले से कर लेनी चाहिए:

  1. स्वच्छता एवं रोगाणुरहित सामग्री:
    • साफ, धुले हुए और सूखे सूती कपड़े/चादरें।
    • नया और रोगाणुरहित (Sterilized) ब्लेड या कैंची (गर्भनाल काटने के लिए)।
    • रोगाणुरहित धागा (गर्भनाल बाँधने के लिए)।
    • डिटॉल/सैवलॉन, साबुन और साफ गुनगुना पानी।
    • एंटीसेप्टिक क्रीम या लोशन और रुई (Cotton)।
  2. माँ के लिए आवश्यक सामग्री:
    • सेनेटरी पैड्स या साफ सूती कपड़े।
    • आरामदायक और ढीले वस्त्र।
  3. नवजात शिशु के लिए सामग्री:
    • शिशु को पोंछने और लपेटने के लिए मुलायम सूती तौलिया या कपड़ा।
    • शिशु के लिए टोपी, मोज़े और ढीले सूती कपड़े।
  4. अन्य आपातकालीन व्यवस्था:
    • रोशनी के लिए टॉर्च या इमरजेंसी लाइट।
    • आपात स्थिति में अस्पताल ले जाने के लिए वाहन (Vehicle) की पूर्व व्यवस्था।

उत्तर:

गर्भावस्था (Pregnancy) के दौरान महिला के शरीर में हार्मोनल और शारीरिक बदलाव होते हैं, जिससे निम्नलिखित 5 सामान्य तकलीफें होती हैं:

  1. प्रातःकालीन मतली/उल्टी (Morning Sickness):
    • गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में सुबह उठते ही जी मिचलाना और उल्टी होना एक सामान्य समस्या है, जो हार्मोनल बदलाव के कारण होती है।
  2. थकान और चक्कर आना (Fatigue and Dizziness):
    • शरीर में हार्मोन के स्तर में बदलाव और ऊर्जा की अधिक खपत के कारण गर्भवती महिला को लगातार थकान और कमजोरी महसूस होती है।
  3. पीठ और कमर दर्द (Backache):
    • गर्भ में शिशु का आकार बढ़ने से शरीर का वजन बढ़ता है और रीढ़ की हड्डी पर दबाव पड़ता है, जिससे पीठ और कमर में दर्द रहता है।
  4. पाचन संबंधी समस्या (कब्ज और एसिडिटी / Constipation & Heartburn):
    • पाचन क्रिया धीमी होने और गर्भाशय के दबाव के कारण गैस, सीने में जलन और कब्ज की शिकायत होती है।
  5. बार-बार पेशाब आना (Frequent Urination):
    • बढ़ता हुआ गर्भाशय मूत्राशय (Bladder) पर दबाव डालता है, जिससे महिला को बार-बार पेशाब जाने की आवश्यकता होती है।

उत्तर: किसी भी उत्पाद (Product) को खरीदते समय उस पर मानक चिह्न (Standard Marks) (जैसे- ISI, AGMARK, FSSAI, Hallmark) देखना निम्नलिखित कारणों से अत्यंत महत्वपूर्ण है:

  1. गुणवत्ता की गारंटी: मानक चिह्न इस बात का प्रमाण होते हैं कि उत्पाद राष्ट्रीय मानकों के अनुसार सही गुणवत्ता के साथ बनाया गया है।
  2. सुरक्षा और स्वास्थ्य: बिजली के उपकरण, खाद्य पदार्थ या दवाइयों पर मानक चिह्न यह सुनिश्चित करते हैं कि वे इस्तेमाल के लिए सुरक्षित हैं और स्वास्थ्य को कोई नुकसान नहीं पहुँचाएंगे।
  3. नकली सामान से बचाव: यह उपभोक्ताओं को बाजार में मिलने वाले घटिया, नकली और मिलावटी सामान से सुरक्षा प्रदान करता है।
  4. पैसे का सही मूल्य (Value for Money): मानक चिह्न वाला सामान खरीदने से उपभोक्ता को अपनी मेहनत की कमाई का सही और गुणवत्तापूर्ण फल मिलता है।
  5. शिकायत का अधिकार: यदि मानक चिह्न वाला उत्पाद खराब निकलता है, तो उपभोक्ता कानूनी रूप से निर्माता के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकता है।

उत्तर: खाद्य पदार्थ (Food Items) समय के साथ अपने प्राकृतिक रूप, स्वाद, गंध और पोषक तत्वों को खो देते हैं। भोजन खराब होने के मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  1. सूक्ष्मजीव (Microorganisms):
    • जीवाणु (Bacteria), फफूँद (Fungi/Moulds) और ईस्ट (Yeast) हवा, पानी और नमी के संपर्क में आकर भोजन पर तेज़ी से पनपते हैं और उसे जहरीला/सड़ा देते हैं।
  2. एंजाइम की उपस्थिति (Enzymes):
    • फल और सब्जियों में प्राकृतिक रूप से एंजाइम मौजूद होते हैं। अत्यधिक पकाने या लंबे समय तक रखे रहने पर ये एंजाइम भोजन का रंग, स्वाद और बनावट खराब कर देते हैं।
  3. नमी और हवा (Moisture and Air):
    • नमी मिलने से सूक्ष्मजीवों की वृद्धि तेज़ हो जाती है। हवा में मौजूद ऑक्सीजन वसायुक्त/तले हुए खाने का ऑक्सीकरण (Oxidation) कर देती है, जिससे उसमें से दुर्गंध आने लगती है (Rancidity)।
  4. तापमान (Temperature):
    • सामान्य या अत्यधिक गर्म तापमान (25°C से 40°C) बैक्टीरिया और फफूँद के पनपने के लिए सबसे अनुकूल होता है, जिससे खाना जल्दी खराब होता है।
  5. कीड़े और चूहे (Insects and Rodents):
    • अनाज और अन्य खाद्य पदार्थों में घुन, कीड़े या चूहे लगने से भी भोजन दूषित और नष्ट हो जाता है।

प्रश्नपत्र उपलब्ध होने के बाद यहां Home Science Subjective Question Answer PDF का डाउनलोड लिंक अपडेट किया जाएगा।

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यह वेबसाइट Sumit Sir के निर्देशन में संचालित है। इस बेवसाइट पर सही और सटीक जानकारी सबसे पहले उपलब्ध कराया जाता है। सुमित सर के पास पिछले पांच साल से ऑनलाइन और ऑफलाइन पढाने का अनुभव है। धन्यवाद।

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