बिहार बोर्ड का सभी प्रमाण पत्र हो गया- ऑनलाइन- यहाँ से देखें:-बिहार बोर्ड के छात्रों और पूर्व छात्रों के लिए एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) ने अपने पुराने और नए सभी प्रमाण पत्रों को डिजिटल (ऑनलाइन) करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसका सीधा लाभ यह होगा कि अब मार्कशीट, सर्टिफिकेट या अन्य शैक्षणिक दस्तावेजों के लिए बोर्ड कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।
पुराने प्रमाण पत्रों को संरक्षित कर डिजिटाइज्ड करेगा बिहार बोर्ड
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (बिहार बोर्ड) पुराने दस्तावेजों को संरक्षित करेगा। इसको लेकर बोर्ड प्रयास कर रहा है। अब तक वर्ष 1980 तक का डाटा बोर्ड के द्वारा सुरक्षित कर लिया गया है। साथ ही उसे डिजिटलाइज्ड भी कर दिया गया है। लेकिन इससे भी जो पुराने डाटा हैं, उन्हें संरक्षित करने में परेशानी आ रही थी। क्योंकि वे काफी पुराने हो चुके हैं और पकड़ने पर टूट जा रहे हैं। उन दस्तावेजों को पहले विशेष केमिकल से साफ और लेमिनेट किया जाएगा ताकि लंबे समय तक उसकी उपयोगिता रहेगी।
हाईटेक हो रहा बोर्ड 1980 तक का डाटा बोर्डने सुरक्षित किया
एक्सपर्ट की मानें तो अगले 50 वर्ष तक इसके बाद इन सर्टिफिकेट्स को कुछ नहीं होगा। पहले हाथ से डिग्री लिखी जाती थी। इसलिए यह भी ध्यान रखा जा रहा है कि केमिकल से लिखा हुआ स्याही फैल न जाये। इसलिए पहले उसे भी विशेष तौर पर सुरक्षित किया जा रहा है। उसके बाद उन सबको लैमिनेट कर उन्हें ऑनलाइन किया जाएगा।
बोर्ड के पास 1952 तक का सर्टिफिकेट
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति के अध्यक्ष आनंद किशोर ने कहा कि एक बार ये दस्तावेज सुरक्षित हो जाएंगे तो फिर उसे आसानी से संबंधित व्यक्ति को दिया जाएगा। साथ ही सत्यापन किया जाएगा। बोर्ड के पास 1952 तक का सर्टिफिकेट है। धीरे-धीरे हम प्रयास कर रहे हैं कि जहां तक संभव हो उन दस्तावेजों को सुरक्षित कर लें। जिस प्रकार से अभिलेखागार में पुरानी पांडुलिपियों को संरक्षित किया जा रहा है बोर्ड भी बिल्कुल यह ध्यान दे रहा है, इन दस्तावेजों को भी उसी प्रकार से संरक्षित कर दिया जाये।
साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि
कब तक के सर्टिफिकेट्स की बोर्ड में मांग आ रही है। वहां तक पहुंचने का मुख्य लक्ष्य है। उसके बाद आगे के दस्तावेजों पर विचार किया जाएगा। जितने भी दस्तावेजों को लैमिनेट किया जाएगा, उन्हें स्कैन करके डिजिटलाइज्ड भी कर दिया जाएगा। वे एक क्लिक पर उपलब्ध होंगे। उन्हें आसानी से निकाला जा सकेगा। सत्यापन भी तेजी से हो पायेगा।
क्या है नया फैसला?
बिहार बोर्ड ने यह निर्णय लिया है कि
- 1952 से लेकर 1980 तक के पुराने प्रमाण पत्रों को सुरक्षित किया जाएगा
- उन्हें डिजिटाइज (Digitalize) कर ऑनलाइन उपलब्ध कराया जाएगा
- आने वाले समय में सभी वर्षों के सर्टिफिकेट चरणबद्ध तरीके से ऑनलाइन मिलेंगे
इससे लाखों छात्रों के दस्तावेज सुरक्षित रहेंगे और कभी भी आसानी से प्राप्त किए जा सकेंगे।
किन-किन प्रमाण पत्रों को किया जाएगा ऑनलाइन?
बिहार बोर्ड द्वारा निम्नलिखित प्रमाण पत्रों को डिजिटल किया जा रहा है:
- मैट्रिक (10वीं) की मार्कशीट
- इंटरमीडिएट (12वीं) की मार्कशीट
- प्रोविजनल सर्टिफिकेट
- माइग्रेशन सर्टिफिकेट
- अन्य शैक्षणिक प्रमाण पत्र
खास बात यह है कि बहुत पुराने रिकॉर्ड, जो अब तक सिर्फ कागजों में थे, उन्हें भी स्कैन कर सुरक्षित रखा जाएगा।
छात्रों को क्या-क्या फायदे होंगे?
इस फैसले से छात्रों को कई बड़े फायदे मिलेंगे:-
- प्रमाण पत्र खोने या खराब होने का डर खत्म
- नौकरी, एडमिशन और वेरिफिकेशन में आसानी
- घर बैठे प्रमाण पत्र डाउनलोड करने की सुविधा
- दलालों और अनावश्यक खर्च से छुटकारा
- समय और पैसे दोनों की बचत
ऑनलाइन प्रमाण पत्र कैसे देखें या डाउनलोड करें? (प्रक्रिया)
जब बोर्ड पोर्टल पूरी तरह एक्टिव हो जाएगा, तब प्रक्रिया इस प्रकार होगी:
- बिहार बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ
- Certificate / Document Verification सेक्शन खोलें
- रोल नंबर, वर्ष और अन्य जरूरी विवरण भरें
- OTP या वेरिफिकेशन के बाद
- प्रमाण पत्र देखें / डाउनलोड करें
ध्यान दें:- अभी यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से लागू हो रही है। सभी वर्षों के रिकॉर्ड धीरे-धीरे जोड़े जाएंगे।
किन छात्रों को सबसे ज्यादा फायदा?
- जिनका सर्टिफिकेट पुराना या खो गया है
- जिन्हें नौकरी या उच्च शिक्षा के लिए तुरंत दस्तावेज चाहिए
- जो दूसरे राज्य या विदेश में रहते हैं
- जिनके सर्टिफिकेट डैमेज हो चुके हैं
महत्वपूर्ण बात (छात्र ध्यान दें)
- अभी सभी वर्षों का डेटा एक साथ उपलब्ध नहीं हो सकता
- बोर्ड द्वारा जैसे-जैसे रिकॉर्ड अपलोड होंगे, सुविधा बढ़ती जाएगी
- केवल आधिकारिक वेबसाइट से ही प्रमाण पत्र डाउनलोड करें
- किसी भी फर्जी वेबसाइट या एजेंट से सावधान रहें
निष्कर्ष
बिहार बोर्ड का यह फैसला छात्रों के भविष्य और सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक ऐतिहासिक कदम है। पुराने से पुराने प्रमाण पत्रों को डिजिटल करना न सिर्फ सुरक्षा बढ़ाएगा, बल्कि छात्रों को आत्मनिर्भर भी बनाएगा।
जैसे ही डायरेक्ट लिंक एक्टिव होगा, यहीं अपडेट दिया जाएगा।
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