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इंटर परीक्षा 2026 का कॉपी मूल्यांकन शुरू | इतना से कम अंक लाने वाले होगें फेल

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By arcarrierpoint

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इंटर परीक्षा 2026 का कॉपी मूल्यांकन शुरू | इतना से कम अंक लाने वाले होगें फेल

इंटर परीक्षा 2026 का कॉपी मूल्यांकन शुरू- बिहार के लाखों छात्र-छात्राओं के लिए बड़ी अपडेट सामने आ चुकी है। इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 की कॉपियों का मूल्यांकन आधिकारिक रूप से शुरू हो गया है। अब सभी विद्यार्थियों की नजर सिर्फ एक सवाल पर टिकी है – पास होने के लिए कितना नंबर चाहिए? और फर्स्ट व सेकंड डिवीजन के लिए कितना अंक लाना होगा?

अगर आप भी 2026 इंटर परीक्षा में शामिल हुए हैं, तो यह पोस्ट आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहाँ आपको मूल्यांकन प्रक्रिया से लेकर पासिंग मार्क्स और डिवीजन सिस्टम तक की पूरी जानकारी सरल भाषा में मिलेगी।

जिले में इंटरमीडिएट और मैट्रिक की परीक्षा संफन होने के बाद अब परिणाम जारी करने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके तहत पहले चरण में उत्तरपुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया जाएगा। इंटरमीडिएट की कॉपियों की जांच 27 फरवरी से शुरू होगी। जिले में बनाए गए पांच मूल्यांकन केंद्रों पर सात लाख से अधिक उत्तरपुस्तिकाओं की जांच की जाएगी। इसके लिए डेढ़ हजार से अधिक परीक्षकों की प्रतिनियुक्ति की गई है। इस बार मूल्यांकन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए सख्त निगरानी व्यवस्था लागू की गई है।

शहर के चैपमैन बालिका विद्यालय, जिला स्कूल, द्वारिकानाथ उच्च विद्यालय, मारवाड़ी उच्च विद्यालय और मुखर्जी सेमिनरी स्कूल को मूल्यांकन केंद्र बनाया गया है। सभी केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे और परिसर की गतिविधियों की लगातार मॉनिटरिंग होगी। प्रत्येक केंद्र पर वीडियोग्राफी भी कराई जाएगी। डीईओ कुमार अरविंद सिन्हा ने बताया कि मूल्यांकन कार्य को समयबद्ध, गोपनीय और त्रुटिरहित ढंग से संपन्न कराने के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। केंद्रों पर बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर पूरी तरह रोक रहेगी। केवल अधिकृत शिक्षक और कर्मचारी ही पहचान पत्र के साथ प्रवेश कर सकेंगे।

मूल्यांकन के दौरान परीक्षक अपने पास मोबाइल नहीं रख सकेंगे। मोबाइल मिलने पर संबंधित परीक्षक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। प्रधान परीक्षकों को निर्देश दिया गया है कि उत्तरपुस्तिकाओं का बंडल खोले जाने के दिन ही उसकी जांच पूरी कर ली जाए। शिक्षा विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि तीन या उससे अधिक अंकों वाले प्रश्नों की जांच एक से अधिक परीक्षकों द्वारा की जाएगी, जबकि 10 अंकों के प्रश्नों की जांच अनिवार्य रूप से तीन परीक्षकों से कराई जाएगी। किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित परीक्षक जवाबदेह होंगे।

मूल्यांकन की गति बनाए रखने के लिए प्रतिदिन 45 से कम कॉपियां जांचने वाले परीक्षक को केवल 300 रुपए मानदेय देने का प्रावधान किया गया है। जिला स्तर पर सभी केंद्रों की नियमित निगरानी होगी और नियम उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का दावा है कि इन व्यवस्थाओं से परिणाम अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय होंगे।

बोर्ड द्वारा राज्यभर में अलग-अलग मूल्यांकन केंद्र बनाए गए हैं। प्रत्येक केंद्र पर अनुभवी शिक्षकों की ड्यूटी लगाई गई है।

मूल्यांकन के दौरान इन बातों का विशेष ध्यान रखा जा रहा है:

  • उत्तर पुस्तिका पर बारकोड सिस्टम
  • दोहरी जांच (संदेह की स्थिति में)
  • ग्रेस मार्क्स की संभावना
  • OMR और थ्योरी की अलग-अलग जांच

इस बार बोर्ड ने सख्त निर्देश दिए हैं कि कॉपी जांच में पारदर्शिता बनी रहे और छात्रों को उनके लिखे गए उत्तर के अनुसार पूरा अंक मिले।

अब सबसे जरूरी सवाल – पास होने के लिए कितना नंबर चाहिए? बिहार बोर्ड इंटर परीक्षा में पास होने के लिए प्रत्येक विषय में कम से कम 30% अंक लाना अनिवार्य है। प्रैक्टिकल विषयों में थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों में अलग-अलग पास होना जरूरी है।

उदाहरण:

अगर किसी विषय का पूर्णांक 100 है तो:

  • पास होने के लिए कम से कम 30 अंक जरूरी हैं।
  • यदि थ्योरी 70 और प्रैक्टिकल 30 है, तो:
  • थ्योरी में कम से कम 21 अंक
  • प्रैक्टिकल में कम से कम 9 अंक

अगर छात्र किसी एक विषय में 30% से कम अंक लाता है, तो वह उस विषय में फेल माना जाएगा।

इंटर परीक्षा में फर्स्ट डिवीजन पाने के लिए कुल अंक का 60% या उससे अधिक होना चाहिए।

उदाहरण:

अगर कुल अंक 500 है, तो फर्स्ट डिवीजन के लिए कम से कम 300 अंक आवश्यक हैं। फर्स्ट डिवीजन पाने वाले छात्रों को आगे एडमिशन और प्रतियोगी परीक्षाओं में प्राथमिकता मिलती है।

सेकंड डिवीजन के लिए कुल अंक का 45% से 59.99% के बीच होना चाहिए।

उदाहरण:

  • 500 में से 225 से 299 अंक लाने पर सेकंड डिवीजन मिलेगा।
  • कुल अंक का 33% से 44.99% के बीच अंक होने पर थर्ड डिवीजन दिया जाता है।

उदाहरण:

  • 500 में से 165 से 224 अंक लाने पर थर्ड डिवीजन।

अगर कोई छात्र

  • किसी एक विषय में 30% से कम अंक लाता है
  • या कुल मिलाकर 33% से कम अंक लाता है

तो उसे फेल घोषित किया जाएगा। हालांकि, बिहार बोर्ड हर साल कुछ छात्रों को ग्रेस मार्क्स भी देता है, खासकर अगर कोई छात्र 1–5 अंकों से फेल हो रहा हो।

बोर्ड के नियम के अनुसार:

  • यदि कोई छात्र 1 या 2 विषयों में कुछ अंकों से फेल हो रहा है
  • और कुल परिणाम सुधार की स्थिति में है

तो बोर्ड सीमित ग्रेस अंक देकर पास कर सकता है। यह पूरी तरह बोर्ड के विवेक पर निर्भर करता है।

कॉपी जांच प्रक्रिया तेज गति से चल रही है। संभावना है कि मार्च के अंतिम सप्ताह या अप्रैल के पहले सप्ताह तक रिजल्ट जारी किया जा सकता है। रिजल्ट जारी होने के बाद छात्र बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर अपना परिणाम देख सकेंगे।

इंटर परीक्षा 2026 की कॉपी जांच शुरू हो चुकी है और लाखों छात्रों का भविष्य अब मूल्यांकन प्रक्रिया पर निर्भर है। पास होने के लिए प्रत्येक विषय में 30% अंक जरूरी हैं।

  • 60% = फर्स्ट डिवीजन
  • 45% = सेकंड डिवीजन
  • 33% = थर्ड डिवीजन

इससे कम अंक लाने वाले छात्र फेल माने जाएंगे, लेकिन कुछ मामलों में ग्रेस अंक का लाभ मिल सकता है।

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यह वेबसाइट Sumit Sir के निर्देशन में संचालित है। इस बेवसाइट पर सही और सटीक जानकारी सबसे पहले उपलब्ध कराया जाता है। सुमित सर के पास पिछले पांच साल से ऑनलाइन और ऑफलाइन पढाने का अनुभव है। धन्यवाद।

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